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पुलिस कमिश्नर सिस्टम: क्यों थी जरूरत, क्या होंगे बड़े बदलाव, जानें सबकुछ

लखनऊ
लखनऊ और नोएडा में लागू हो गया है। प्रयागराज जोन के एडीजी सुजीत पांडेय लखनऊ के और एडीजी आलोक सिंह नोएडा के पहले पुलिस कमिश्नर होंगे। लखनऊ जिले के 40 थाने पुलिस कमिश्नर सिस्टम के तहत काम करेंगे, जबकि पांच ग्रामीण थाने पुरानी व्यवस्था पर ही चलेंगे। इन पांच थानों के लिए एसपी लखनऊ का पद होगा, जिस पर आईपीएस अफसर की तैनाती होगी। देर रात इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई।

वर्तमान में लखनऊ की आबादी करीब 40 लाख है। इसे ध्यान में रखते हुए लखनऊ के 40 थानों को मेट्रोपॉलिटन सिटी का हिस्सा मानते हुए कमिश्नर सिस्टम के लिए चुना गया है। यहां एडीजी स्तर का अधिकारी पुलिस कमिश्नर के रूप में काम करेगा। उनके साथ आईजी स्तर के दो जॉइंट पुलिस कमिश्नर तैनात किए गए हैं। इसके अलावा एसपी रैंक के नौ आईपीएस अधिकारी तैनात होंगे।

ये 40 थाने आएंगे दायरे में
आलमबाग, अलीगंज, अमीनाबाद, आशियाना, बाजारखाला, चौक, कैंट, चिनहट, गोमतीनगर, गुंडबा, गाजीपुर, गौतमपल्ली, हसनगंज, हजरतगंज, हुसैनगंज, इंदिरानगर, जानकीपुरम, कैसरबाग, कृष्णानगर, महानगर, मानक नगर, मड़ियांव, नाका, पारा, पीजीआई, सरोजनीनगर, तालकटोरा, सआदतगंज, ठाकुरगंज, विभूतिखंड, विकास नगर, वजीरगंज, काकोरी, नगराम, महिला थाना, मोहनलालगंज, सुशांत गोल्फ सिटी (प्रस्तावित), गोमती नगर विस्तार (प्रस्तावित)।

यहां रहेगी पुरानी व्यवस्था
बीकेटी, इंटौजा, मलिहाबाद, निगोहा, माल और रहीमाबाद (प्रस्तावित)।

यह है कमिश्नर व्यवस्था
भारतीय पुलिस अधिनियम के तहत डीएम के पास पुलिस पर नियंत्रण के अधिकार होते हैं। कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद ये अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास चले जाएंगे। सीआरपीसी के तहत एग्जिक्यूटिव मैजिस्ट्रेट के अधिकार, जो प्रशासन के पास होते हैं वे अब पुलिस के पास होंगे।

ये बड़े बदलाव होंगे
1-अब डीएम के पास पुलिस का नियंत्रण नहीं होगा।
2-धारा-144 लागू करने, कर्फ्यू लगाने का अधिकार, गैंगस्टर और गुंडा ऐक्ट की कार्रवाई पुलिस सीधे कर सकेगी।
3-जुलूस-प्रदर्शन की अनुमति पुलिस देगी, सीआरपीसी की धारा 151 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई भी कर सकेगी।
4-ये अधिकार अब तक डीएम व प्रशासनिक अफसरों के पास थे।
5-लखनऊ में आयुक्त समेत 13 आईपीएस अफसर बैठेंगे तो नोएडा में 10 आईपीएस अफसर होंगे। अब तक दो से तीन आईपीएस अफसर तैनात होते थे। थानों व स्टाफ की संख्या भी बढ़ेगी।
6-लेकिन राजस्व से जुड़े अधिकार डीएम के पास ही रहेंगे। आर्म्स ऐक्ट, सराय ऐक्ट, आबकारी, मनोरंजन कर और परिवहन आदि जिलाधिकारी के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे।

इसलिए थी जरूरत
भारतीय पुलिस ऐक्ट व सीआरपीसी के तहत 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में कमिश्नर प्रणाली की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में लखनऊ की आबादी करीब 40 लाख और नोएडा की 25 लाख है। यूपी में लंबे समय से इसे लागू करने की कवायद चल रही थी। हाल ही में सीएए को लेकर हुई हिंसा के बाद यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर कार्रवाई करने को लेकर पुलिस को प्रशासन का मुंह देखना पड़ता है। धारा-144 व निरोधात्मक कार्रवाई का अधिकार पुलिस के पास होता तो नियंत्रण आसान होता। यह भी बात उठी कि बड़े शहरों में अनुभवी अफसरों की जरूरत है। इसके बाद ही कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने की कवायद तेज हुई।

56 गजेटेड अफसर बढ़ेंगे
एक पुलिस आयुक्त, दो संयुक्त पुलिस आयुक्त, 10 पुलिस उपायुक्त, 13 अपर पुलिस आयुक्त, 28 सहायक पुलिस आयुक्त, एक रेडियो अधिकारी व एक मुख्य अग्निशमन अधिकारी।

अधिकारों पर ‘दोहरी तलवार’
पुलिस पर आम तौर पर सबसे अधिक सवाल अपने अधिकारों के दुरुपयोग के लगते हैं। कमिश्नरी प्रणाली को हाशिए पर डालने के लिए आईएएस लॉबी भी कमोबेश इसी तर्क पर चलती है। पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन तर्क देते हैं कि पुलिस से कोई शिकायत हो तो व्यक्ति डीएम के पास जाता है। कमिश्नरी प्रणाली से इस ‘चेक ऐंड बैलेंस’ पर असर पड़ेगा। हालांकि, कमिश्नरी सिस्टम के समर्थकों का तर्क है कि बहुत बार प्रक्रियात्मक देरी के कारण पुलिस प्रभावी कदम नहीं उठा पाती, क्योंकि उसके पास मैजिस्ट्रेटी पावर नहीं होती।

दरअसल, अधिकारों की इस ‘तलवार’ का इस्तेमाल ही कमिश्नरी सिस्टम की आगे की राह तय करेगा। पुलिस के पास अब धारा-144 लागू करने से लेकर, निरोधात्मक गिरफ्तारियों के अधिकार होंगे। राजनीतिक आंदोलनों, प्रदर्शनों में इसका इस्तेमाल सर्वाधिक होता है। ऐसे में न केवल सियासी दल बल्कि ब्यूरोक्रेसी भी इन अधिकारों को ही आधार बनाकर पुरानी व्यवस्था को वापस करने की दलील देगी।

पुलिस कमिश्नर को मिले अधिकार
1-आईपीसी की धारा-58 व अध्याय-8 (परिशांति कायम रखने के लिए और सदाचार के लिए प्रतिभूति) और अध्याय -10 (लोक व्यवस्था व शांति बनाए रखना)
2-यूपी गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 (गैंगस्टर ऐक्ट)
3-यूपी गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 (यूपी अधिनियम संख्या, 8 सन 1971) (गुंडा ऐक्ट)
4-विष अधिनियम, 1919
5-अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, 1956
6-पुलिस (द्रोह उद्दीपन) अधिनियम, 1922
7-पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960
8-विस्फोटक अधिनियम, 1884
9-कारागार अधिनियम, 1894
10-सरकारी गोपनीयता अधिनियम, 1923
11-विदेशी अधिनियम, 1946
12-गैर कानून गतिविधियां रोकथाम (अधिनियम)
13-भारतीय पुलिस अधिनियम, 1861
14-यूपी अग्निशमन सेवा अधिनियम, 1944
15-यूपी अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा अधिनियम, 2005

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