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पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगलों को लेकर लाए गए अध्यादेश के खिलाफ याचिका पर अदालत ने की सुनवाई

नैनीताल, 13 सितंबर (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर नेताओं को आवंटित बंगलों के बाजार दर पर किराया चुकाने से छूट संबंधी अध्यादेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की। उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों को बड़ी राहत देने वाले अध्यादेश को पिछले हफ्ते मंजूरी दी थी। यह अध्यादेश पूर्व मुख्यमंत्रियों भगत सिंह कोश्यारी, स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी, रमेश पोखरियाल निशंक, भुवन चंद्र खंडूरी और विजय बहुगुणा के लिए राहत के तौर पर आया जिन्हें उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप राज्य सरकार को 13 करोड़ रुपये चुकाने थे। सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश कौशल के एनजीओ ने इसके खिलाफ याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने इस अध्यादेश को असंवैधानिक करार दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा ने जनहित याचिका पर सुनवाई की। एनजीओ के वकील ने याचिका में कहा कि अध्यादेश उच्च न्यायालय के आदेश को पलटने के एकमात्र मकसद से लागू किया गया। वकील कार्तिकेय हरि गुप्ता ने तर्क दिया, ‘‘विधानसभा के पास इस प्रकार की विधायी शक्ति नहीं है। वह केवल अदालत का आदेश पलटने के लिए कानून पारित नहीं कर सकती।’’ गुप्ता ने बताया कि याचिका पर सुनवाई को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया। उत्तराखंड की राज्यपाल ने अगस्त में राज्य मंत्रिमंडल द्वारा पारित अध्यादेश को पिछले सप्ताह मंजूरी दे दी थी। इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने पूर्व पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी गई इस सुविधा को ‘‘अवैध’’करार दिया था और उनसे छह महीने में बंगले खाली करने को कहा था। अवधेश कौशल की जनहित याचिका पर अदालत ने यह फैसला सुनाया था।

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