Tuesday , October 15 2019, 4:51 PM
ब्रेकिंग न्यूज
Hindi News / राज्य / पश्चिम बंगाल / प्लेट से गायब हो रही हिल्सा फिश, बांग्लादेश की नदी में तरफ हो रही विस्थापित

प्लेट से गायब हो रही हिल्सा फिश, बांग्लादेश की नदी में तरफ हो रही विस्थापित

अचिंत्यारूप राय, कोलकाता
के किनारों पर फैला कचरा और जगह-जगह बिखरे जालों के चलते हिल्सा मछलियों ने अपना स्थान बदलना शुरू कर दिया है। बंगाल की नदियों से हिल्सा मछलियों की संख्या में आ रही कमी की यह एक बड़ी वजह है। इस वजह से रिटेल मार्केट में इनकी कीमतों पर भी असर पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, 2002-03 में हुगली में 62,600 हिल्सा पकड़ी गई थीं जबकि डेढ़ दशक बाद (2017-18) यह संख्या घटकर आधी 27,539 टन ही रह गई। जबकि इसी समय अंतराल में बांग्लादेश में हिल्सा की पकड़ बढ़कर 1,99,032 टन से 5,17,000 टन हो गई है।

केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान के रिटायर्ड डिविजनल हेड उत्पल भौपिक के अनुसार, ‘उत्तरी बंगाल की खाड़ी में एकत्रित हिल्सा स्पॉनिंग सीजन में धारा के प्रतिकूल दिशा में अपनी यात्रा के लिए तीन मार्ग अपनाती हैं- हुगली नदी, बांग्लादेश में और म्यांमार में इरावती नदी। हालांकि हुगली में अत्यधिक कचरा और फिशिंग पर प्रतिबंध न होने के चलते हिल्सा ने अपना माइग्रेशन रूट बदल लिया है और मेघना नदी में विस्थापन शुरू कर दिया है।’

बांग्लादेश में 75% और भारत में सिर्फ 5% हिल्सा
आज बांग्लादेश में करीब 75 फीसदी हिल्सा पकड़ी जा रही हैं जबकि म्यांमार में 15 और भारत और बाकी देशों में इनकी पकड़ मात्र 5 फीसदी रह गई है। भौपिक ने बताया, ‘हिल्सा 30 से 40 फीट से कम गहरे पानी में प्रवेश नहीं करती हैं लेकिन हुगली में फरक्का बैराज और ड्रेजिंग की कमी की वजह से इसकी गहराई कम हो रही है।’

अत्यधिक फिशिंग की वजह से कम हो रही मछलियां
पूर्वी मिदनापुर के कोंतई के निवासी हिल्सा मछुआरे देबब्रत खुटिया ने बताया, ‘यहां ओवरफिशिंग की अधिक समस्या है। कुछ साल पहले तक यहां 3 हजार नावें हुआ करती थीं और अब 6 हजार फिशिंग नावों का संचालन हो रहा है।’ स्मॉल स्केल फिश वर्कर्स (इनलैंड) के नैशनल प्लैटफॉर्म के प्रदीप चटर्जी ने बताया, ‘2 किमी लंबे सैकड़ों जाल नदी में बिछे हुए हैं। ऐसे में मछलियां यहां कैसे प्रवेश कर पाएंगे। खुद को जीवित रखने के लिए हिल्सा मेघना नदी की ओर विस्थापित हो रही हैं जहां नदी की गहराई 50 से 60 फीट है।’

5 इलाकों को बनाया था हिल्सा सेंचुरी
जादवपुर विश्वविद्यालय के समुद्र विज्ञान अध्ययन संस्थान की ईशा दास बताती हैं, ‘पहले हिल्सा मछलियां प्रयागराज तक यात्रा करती थीं लेकिन अब ये फरक्का बैराज तक पार नहीं कर पाती हैं।’ बता दें कि 2013 में पश्चिम बंगाल सरकार ने 5 इलाके- हुगली के अलग-अलग हिस्सों के साथ, मातला, रायमंगल और ठकुरान नदी को हिल्सा सेंचुरी घोषित किया था। इसके अलावा 23 सेमी से कम लंबाई वाली हिल्सा को पकड़ने, रखने, ट्रांसपोर्ट करने और बेचने पर रोक लगाई गई थी। इसी के साथ हर साल 15 सितंबर से 24 अक्टूबर तक के समय अंतराल में फुल मूल के 5 दिन पहले और 5 दिन बाद तक हिल्सा फिशिंग पूरी तरह प्रतिबंधित थी।

Check Also

आईआईटी खड़गपुर की रिसर्च टीम ने जैव ईंधन बनाने के लिए विकसित की नई तकनीक

कोलकाता आईआईटी खडगपुर के अनुसंधानकर्ताओं ने एक विकसित की है जो जैव ईंधन बनाने के …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *