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बिल्किस बानो के पति ने कहा: शीर्ष अदालत के आदेश के बावजूद गुजरात सरकार ने मदद नहीं की

अहमदाबाद, 30 सितंबर (भाषा) गुजरात में 2002 के दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई बिल्किस बानो के पति ने कोई सहायता मुहैया नहीं करने को लेकर राज्य की विजय रूपाणी नीत सरकार की सोमवार को आलोचना की। बिल्किस को दो हफ्ते के अंदर 50 लाख रुपये मुआवजा देने के उच्चतम न्यायालय के आदेश के कुछ घंटों बाद ही उनके पति याकूब रसूल ने यह आरोप लगाया। रसूल ने दाहोद से फोन पर पीटीआई भाषा से कहा कि बिल्किस बानो 17 साल से पीड़ा सह रही है लेकिन गुजरात सरकार ने शीर्ष अदालत के आदेश के बावजूद उसकी मदद करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने 13 अप्रैल को राज्य सरकार को उन्हें 15 दिनों के अंदर मुआवजा देने को कहा था। अब पांच महीने हो चुके हैं लेकिन सरकार ने हमसे एक बार भी संपर्क नहीं किया।’’ रसूल ने कहा कि उनके परिवार ने विजय रूपाणी नीत राज्य सरकार को दो नोटिस भेजे, उसे न्यायालय के आदेश की याद दिलाई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने फिर से शीर्ष न्यायालय का रुख किया। उन्होंने कहा, ‘‘देखते हैं कि राज्य सरकार अब क्या करती है। उसे 15 दिनों के अंदर आदेश का अनुपालन करना होगा अन्यथा अदालत की अवमानना होगी। हम सभी जानते हैं कि बिल्किस ने पिछले 17 बरसों में काफी कुछ झेला है लेकिन हार नहीं मानी।’’ उल्लेखनीय है कि शीर्ष न्यायालय ने सोमवार को गुजरात सरकार को निर्देश दिया कि वह बिल्किस बानो को दो सप्ताह के भीतर 50 लाख रुपये मुआवजा, नौकरी और रहने के लिये आवास प्रदान करे। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगाई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने गुजरात सरकार से सवाल किया कि शीर्ष अदालत के 23 अप्रैल के आदेश के बावजूद उसने अभी तक बिल्किस बानो को मुआवजा, नौकरी और आवास क्यों नहीं दिया। गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गुजरात के पीड़ितों को मुआवजा योजना में 50 लाख रुपये के मुआवजे का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार अप्रैल के इस आदेश पर पुनर्विचार के लिये आवेदन दायर करेगी। सॉलिसीटर जनरल ने बाद में न्यायालय में यह आश्वासन दिया कि दो सप्ताह के भीतर पीड़ित को मुआवजे की राशि, नौकरी और आवास उपलब्ध करा दिया जायेगा। घटना के वक्त बिल्किस गर्भवती थी। उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था। उसके परिवार के सात सदस्य मारे गये थे।

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