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बीएसपी में फिर गहराया 'विश्वास' का संकट!

लखनऊ
राजस्थान में विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने की घटना के बाद भले पार्टी प्रमुख मायावती कांग्रेस को धोखेबाज और अवसरवादी बता रही हों, लेकिन इससे एक बार फिर बीएसपी में ” का उभरता दिख रहा है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि 1995 में मायावती को सत्ता मिलने के बाद ही इसकी शुरुआत हो गई थी। बीएसपी सरकार में मंत्री रहे मौजूदा समय में कांग्रेस के सदस्य आरके चौधरी बताते हैं कि तब राज बहादुर समेत अन्य विधायकों ने मायावती का नेतृत्व स्वीकारने से इनकार कर दिया था और बीएसपी से अलग हो गए थे।

वहीं, राजनीतिक जानकारों की मानें तो यूपी की जगह बाकी प्रदेशों में इस तरह की टूट के मायने काफी अलग हैं। उनके मुताबिक, बाकी प्रदेशों का हाल यह है कि वहां चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी सत्ता में नहीं आ पाती है। कुछ प्रत्याशी जीतते हैं, तो जाहिर है कि वे महंगे होते चुनाव में इतना पैसा लगाकर केवल विपक्ष में बैठना नहीं चाहेंगे। वहीं, मायावती की उन पर पकड़ भी यूपी की तुलना में काफी कमजोर होती है। ऐसे में वे या तो नाफरमानी करते हैं या पार्टी से अलग हो जाते हैं। इतिहास के आईने में देखा जाए तो साल 2008 में राजस्थान में भी इस तरह की टूट देखने को मिली थी। तब पार्टी के छह विधायक बीएसपी से अलग होकर कांग्रेस में ही शामिल हुए थे। यह अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद हुआ था। यूपी के अलावा राजस्थान ही ऐसा प्रदेश रहा है, जहां बीएसपी के प्रत्याशी अन्य राज्यों की अपेक्षा कुछ सीटें पा जाते हैं।

नाफरमानी न करें तो क्यों?
आरके चौधरी कहते हैं कि मायावती का नेतृत्व इन लोगों की नाफरमानी की बड़ी वजह है। उनके मुताबिक, मायावती कई बार बड़ी तानाशाह हो जाती हैं। उनके आदेश उन लोगों को बिल्कुल नहीं पसंद आते जो केवल जातीय समीकरण के आधार पर नहीं जीतते। स्थानीय राजनीति में आने वाले बदलाव भी उन्हें कई बार बागी बना देते हैं। या फिर यूं भी कहा जा सकता है कि विधायकों को बदलाव के मुताबिक फैसले लेने की कोई छूट नहीं है। कर्नाटक में मायावती ने बीएसपी विधायक को कांग्रेस के पक्ष में वोट करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। इसके अलावा एमपी व राजस्थान में समर्थन देने के बावजूद मायावती कांग्रेस पर लगातार आरोप भी लगाती रहीं। ऐसी स्थिति में वहां के विधायकों के लिए आसान नहीं कि वे किस ओर चलें। यही वजह थी कि मायावती के कहने के बाद भी कुछ बिल पर बीएसपी विधायकों ने कांग्रेस का समर्थन नहीं किया।

यूपी में भी टूट चुके हैं विधायक
उत्तर प्रदेश की बात करें तो कल्याण सिंह के समय बीएसपी के विधायक दो अलग-अलग नेताओं की अगुआई में टूटे थे। एक गुट का नेतृत्व चौधरी नरेंद्र देव सिंह ने किया था। बाद में इन विधायकों की सदस्यता खत्म करने के लिए स्पीकर के यहां मुकदमा भी चला। नतीजा ऐसा रहा कि कल्याण सिंह बहुमत साबित करने में कामयाब रहे। 2003 में एक बार फिर इसी तरह की टूट हुई। तब सभी विधायकों ने मुलायम सिंह का समर्थन कर दिया था।

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