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भील जनजाति पर आपत्तिजनक टिप्पणियां: पश्नपत्र निर्माता, जांचकर्ता से जवाब-तलब

इंदौर, 13 जनवरी (भाषा) मध्य प्रदेश की राज्य प्रशासनिक सेवा की प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्र में भील समुदाय पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले के तूल पकड़ने के बाद एमपीपीएससी प्रशासन ने इस चूक पर सोमवार को अफसोस जाहिर किया। इसके साथ ही, विवादास्पद प्रश्नपत्र तैयार करने वाले व्यक्ति और तैयार पर्चे को छपाई से पहले जांचने वाले शख्स से हफ्ते भर में जवाब मांगा गया है। प्रश्नपत्र में भील जनजाति पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले से जुड़े सवालों पर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के अध्यक्ष भास्कर चौबे ने यहां संवाददाताओं से कहा, “(प्रश्नपत्र तैयार करने में) जो भी चूक हुई, वह नहीं होनी चाहिए थी। इस मामले में एमपीपीएससी को क्षोभ है और इससे मैं खुद भी दु:खी हूं।” उन्होंने कहा, “हम पता लगा रहे हैं कि राज्य प्रशासनिक सेवा की प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र तैयार करने में चूक कैसे हुई? हमने संबंधित प्रश्नपत्र के सेटर (प्रश्नपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति) और मॉडरेटर (तैयार पर्चे को छपाई से पहले जांचने वाला शख्स) को नोटिस जारी कर उनसे सात दिन के भीतर जवाब-तलब किया है। नोटिस के जवाब के आधार पर आगामी कदम उठाया जाएगा।” एमपीपीएससी अध्यक्ष ने हालांकि भर्ती परीक्षा की गोपनीयता का हवाला देते हुए विवादास्पद प्रश्नपत्र के ‘सेटर और मॉडरेटर’ के नामों का खुलासा करने से इनकार कर दिया। चौबे ने बताया कि तय प्रक्रिया के मुताबिक एमपीपीएससी की विषय विशेषज्ञ समिति विवादास्पद प्रश्न को लेकर परीक्षार्थियों की आपत्तियों की जांच करेगी। जांच के बाद इस समिति की सिफारिशों के आधार पर एमपीपीएससी मामले में उचित कदम उठाएगा। उन्होंने हालांकि बताया कि अगर यह समिति ‘पेपर सेटर’ और ‘मॉडरेटर’ के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा करती है, तो “अधिकतम” प्रावधानों के मुताबिक उन्हें एमपीपीएससी की परीक्षा प्रणाली से हमेशा के लिए बाहर किया जा सकता है। चूक के लिए जिम्मेदार लोगों पर एमपीपीएससी द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की मांग को चौबे ने यह कहते हुए खारिज कर दिया, “यह मामला कोई आपराधिक प्रकरण थोड़ा ही है।” एमपीपीएससी की रविवार को आयोजित भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र का एक गद्यांश भील जनजाति पर आधारित था और परीक्षार्थियों को इसे पढ़कर कुछ सवालों के उत्तर देने थे। विवादास्पद गद्यांश में कहा गया, “भीलों की आपराधिक प्रवृत्ति का एक प्रमुख कारण यह भी है कि (वे) सामान्य आय से अपनी देनदारियां पूरी नहीं कर पाते। फलत: धन उपार्जन की आशा में गैर वैधानिक और अनैतिक कार्य में भी संलिप्त हो जाते हैं।” भीलों की “वधू मूल्य” (वह राशि और उपहार जो विवाह के वक्त वर पक्ष द्वारा वधू के परिजनों को दिए जाते हैं) प्रथा का जिक्र करते हुए गद्यांश में यह भी कहा गया, “भील, वधू मूल्य रूपी पत्थर से बंधी शराब के अथाह सागर में डूबती जा रही जनजाति है।” इस गद्यांश पर कई आदिवासी संगठनों, विद्यार्थी संगठनों तथा नेताओं ने आक्रोश जताया है।

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