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मप्र में एससी, एसटी वर्ग के लोगों से पुलिस हिरासत में अभद्र व्यवहार, मारपीट नहीं करने के निर्देश

भोपाल, छह नवंबर :भाषा: मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के पुलिसकर्मियों को किसी भी व्यक्ति, विशेषकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को अधिक आवश्यक होने पर ही विधि अनुसार हिरासत में लेने तथा पुलिस अभिरक्षा में उनके साथ कोई अभद्र व्यवहार अथवा मारपीट नहीं करने के निर्देश जारी किये हैं। इस पत्र को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस शुरु हो गयी और भाजपा ने इस पत्र आपत्ति प्रकट की है। आदेश की प्रति भी यहां सोशल मीडिया में वायरल हो गयी है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक वी के सिंह ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति आयोग की आपत्तियों के मद्देनजर चार नंबर को प्रदेश के सभी जिला पुलिस प्रमुखों को यह निर्देश पत्र जारी किए हैं। आयोग ने आपत्ति प्रकट की थी कि आरक्षित समुदाय के लोगों के साथ न केवल मारपीट की गई बल्कि पुलिस हिरासत में दुर्व्यवहार भी किया गया। आदेश में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि एससी, एसटी समुदाय के व्यक्तियों को कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। साथ ही यह सुनिश्चत किया जाये कि पुलिस हिरासत में किसी भी एसटी और एससी वर्ग के व्यक्ति के साथ अभद्र व्यवहार अथवा मारपीट न की जाये। मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता आशुतोष प्रताप सिंह ने बताया, ‘‘अलीराजपुर में एक केस हुआ था जिसमें पुलिस ने कुछ आदिवासियों को अगस्त में हिरासत में लिया था। उसके बाद एसटी आयोग ने इसे संज्ञान में लेकर तीन निर्देश दिये थे। पहला अलीराजपुर के बाहर के अधिकारी से जांच कराई जाये तो इसमें एसडीओपी मनावर को जांच सौंपी गयी थी। दूसरा, प्रत्येक पीड़ित को राहत राशि दी जाये तो इस मामले में पांच लोगों को, प्रत्येक को पचास हजार रुपये की राहत राशि दी गयी। तीसरा, पुलिस मुख्यालय या पुलिस महानिदेशक ऐसे निर्देश जारी करें जिससे इस वर्ग के लोगों पर कोई अत्याचार ना हो। इस पर पुलिस महानिदेशक द्वारा सभी पुलिसकर्मियों को यह निर्देश जारी किया गया है।’’ प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने इसे समाज को बांटने वाली धारणा बताया । उन्होंने कहा कि अच्छा होता, कानून का राज कैसे हो इसको लेकर निर्देश होते। वैसे भी मध्यप्रदेश के कई इलाके इस दृष्टि से संवेदनशील रहे हैं और दो बार इस प्रकार हिंसा हो चुकी है ।’’ वहीं प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा कि चूंकि पत्र राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के निर्देश पर लिखा गया है इसलिये उसमें एसटी, एससी का उल्लेख किया गया है। भाजपा के लोग चूंकि पढ़ने लिखने के अभ्यस्थ नहीं है इसलिये उसमें उन्होंने वो लाइनें नहीं पढ़ी हैं जिसमें डीजीपी ने यह लिखा है कि किसी भी व्यक्ति को कानून की मर्यादा के अंदर ही अभिरक्षा में रखा जा सकता है और कानून का सख्ती से पालन किया जाये। इसमें उन्होंने विशेष रुप से एसटी जाति का उल्लेख इसलिये किया है क्योंकि एसटी आयोग ने कुछ घटनाएं सरकार के संज्ञान में लाई थीं। इस पत्र में कुछ भी आवांछित नहीं है और पत्र शुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई है।’’

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