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मोदी ने UN में किया इस तमिल कवि का जिक्र

चेन्नै
महासभा के मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में प्रसिद्ध तमिल कवि और दर्शनशास्त्री का जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उद्धरणों का भी स्मरण किया। मोदी ने इन महान व्यक्तित्वों के उद्धरणों के जरिए इस बात पर जोर दिया कि खंडित दुनिया किसी के भी हित में नहीं है।

तमिल कवि कनियन पुंगुदरनार के प्रसिद्ध उद्धरण ‘याधुम ऊरे यावरुम केलिर’ का हवाला देते हुए ने कहा कि सीमा से इतर संबंधों की यह समझ भारत की विशिष्टता है। तमिल कवि की इस उक्ति का आशय ‘वसुधैव कुटुंबकम’ से है। खुद पीएम मोदी ने भी इसका मतलब समझाते हुए कहा, ‘हम सभी स्थानों के लिए अपनेपन का भाव रखते हैं। देश की सीमाओं से परे अपनत्व की यही भावना ही भारत की विशेषता है।’

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कौन थे कनियन पुंगुदरनार
संगम युग के कवि आज से लगभग 3000 साल पहले पैदा हुए थे। उन्हें कविता के अलावा ज्योतिष शास्त्र और गणित में योगदान के लिए जाना जाता है। इसके अलावा वह एक प्रभावी दर्शनशास्त्री भी थे। उनका जन्म तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के तिरुपुर तालुके के माहिबलनपट्टी गांव में हुआ था।

आपको यह भी बता दें कि कवि कनियन खुद भी वसुधैव कुटुंबकम के समर्थक थे। उन्होंने इंसानों के बीच किसी भी तरह के विभाजन को नकारा। कनियन ने मानवता को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। वह अपनी कविताओं में भी हर किसी को अपना परिवार बताया। गौरतलब है कि जिस कविता को प्रधानमंत्री मोदी ने उद्धरित किया। उसे शिकागो में होने वाले 10वें तमिल सम्मेलन का थीम सॉन्ग बनाया गया है।

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