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मोदी 2.0 के पहले 100 दिनों में हवा हुए निवेशकों के ~14 लाख करोड़

– सक्रियता से ट्रेड होनेवाले 2,664 शेयरों में से 2,290 शेयरों में अब तक 96% गिरावट आ चुकी है

– इनमें से 422 शेयरों में 40% तक और 1,371 में 20% तक और 1,872 शेयरों में 10% तक कमजोरी आई है

दीपक जासानी

रिसर्च हेड, HDFC सिक्योरिटीज

मोदी सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर सरकारी खजाने को लेकर कंजर्वेटिव रुख अपनाते हुए कुछ कदम उठाए हैं। ये उपाय ग्रोथ में रिवाइवल के लिए पर्याप्त साबित होंगे या नहीं, यह बहस का विषय है लेकिन इकनॉमी में नई जान डालने के लिए सरकार एक सीमा तक ही कदम उठा सकती है। हमें धीरज रखना चाहिए

[ अमित मुद्गिल | ETMarkets.com ]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिनों में भले कई मोर्चों पर कामयाबी के झंडे गाड़े हों, लेकिन शेयर बाजार की शिकायतें बनी हुई हैं। मोदी की अगुआई में एनडीए की दूसरी बार सरकार बनने के बाद से अब तक शेयर बाजार की हालत निराश करने वाली रही है। एनडीए सरकार को लोकसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद बाजार में बना उत्साह धीरे-धीरे ठंडा पड़ गया। बाजार में लगातार हुई बिकवाली में इक्विटी इनवेस्टर्स के 14 लाख करोड़ रुपये हवा हो गए।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत बढ़ाने और आर्थिक वृद्धि दर में आ रही सुस्ती दूर करने के लिए पिछले महीने एक के बाद एक कई उपायों का ऐलान किया था, लेकिन उनसे खास मदद नहीं मिली। एनालिस्टों का कहना है कि इकनॉमिक स्लोडाउन साइक्लिकल है और वह तय समय में ही पलटेगा और उसमें वक्त लगेगा। चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए ये निवेशकों को धीरज रखने और रिवाइवल के शुरुआती संकेतों पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं।

मोदी ने 30 मई को जब से दूसरी बार प्रधानमंत्री पद संभाला है, तब से बीएसई पर लिस्टेड सिर्फ 14% शेयर पॉजिटिव रिटर्न देने में कामयाब रहे हैं। बीएसई पर लिस्टेड और सक्रियता से ट्रेड होनेवाले 2,664 शेयरों में से 2,290 शेयरों में अब तक 96% गिरावट आ चुकी है। इनमें से 422 शेयरों में 40% तक और 1,371 में 20% तक गिरावट आई है जबकि 1,872 शेयरों में 10% तक कमजोरी आई है। इस दौरान कुलमिलाकर बीएसई शेयरों का मार्केट वैल्यूएशन 14.15 लाख करोड़ रुपये गिरकर 140 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड दीपक जासानी ने कहा, ‘मोदी सरकार का प्रदर्शन राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर अच्छा रहा है। आर्थिक मोर्चे पर उसने सरकारी खजाने को लेकर कंजर्वेटिव रुख अपनाते हुए कुछ कदम उठाए हैं। ये उपाय ग्रोथ में रिवाइवल के लिए पर्याप्त साबित होंगे या नहीं, यह बहस का विषय है लेकिन इकनॉमी में नई जान डालने के लिए सरकार एक सीमा तक ही कदम उठा सकती है। हमें धीरज रखना चाहिए।’

वित्त मंत्री ने एफपीआई के इनकम पर लगनेवाले सरचार्ज में बढ़ोतरी वाला कदम वापस ले लिया है, जो बाजार के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा था लेकिन इकनॉमिक स्लोडाउन और डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी के चलते फॉरेन इनवेस्टर्स को मोदी के दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिनों में बाजार से 31,700 करोड़ रुपये निकालने पर मजबूर कर दिया। मोदी के सत्ता में लौटने की उम्मीद पर फरवरी से मई के बीच बाजार में जो उत्साह का माहौल बना था, उसमें FPI की तरफ से इंडियन मार्केट में 83,000 करोड़ रुपये आए थे।

सरकार की तरफ से हुए राहत के हालिया ऐलान अब तक तो मार्केट सेंटीमेंट मजबूत करने में नाकामयाब रहे हैं क्योंकि दुनियाभर के बाजारों को मंदी की चिंताओं ने जकड़ रखा है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों 7-8 पर्सेंट तक कमजोर हुए हैं जबकि PSU बैंकों की बुरी तरह पिटाई हुई है और उनका एक चौथाई वैल्यूएशन खत्म हो चुका है। रुपये में कमजोरी के चलते डरे कुछ निवेशक IT और फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टर की तरफ रुख कर रहे हैं। ऑटो और बैंकिंग जैसे घरेलू उपभोग पर आधारित क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में गिरावट की जोरदार मार पड़ी है।

जीडीपी ग्रोथ जून क्वॉर्टर में गिरकर छह साल के निचले स्तर 5 पर्सेंट पर आ गई। अगस्त में ऑटोमोबाइल्स की सेल्स का आंकड़ा दसवें महीने में गिरा, सीमेंट का भाव तीन महीने से कमजोर हो रहा है। PMI डेटा भी कमजोर सेंटीमेंट होने का संकेत दे रहे हैं। इधर, आरबीआई की तरफ से हुए रेट कट के स्लो ट्रांसमिशन के बीच लिक्विडिटी प्रेशर में भी कमी आई है।

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