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मौसम के लिए महानवमी के दौरान चित्तौड़गढ़ के एक मंदिर में हुई पशुबलि

उदयपुर
पूजा-अर्चना के नाम पर जानवरों की बलि को लेकर हमेशा से ही सवाल खड़े किए जाते रहे हैं। स्थित एक प्रमुख मंदिर में सोमवार को के मौके पर मां काली को प्रसन्न करने के लिए दी गई। भैंसे की बलि को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर में इकट्ठा हुए। बता दें कि क्षेत्र में खासा प्रभुत्व रखने वाले लोगों ने मां काली को भैंसा अर्पित किया।

सोशल मीडिया पर पशु बलि का विडियो वायरल होने के बाद जिला कलेक्टर चेतनराम देवड़ा और एसपी (चित्तौड़गढ़) अनिल कायल ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। एसपी ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बताया, ‘यह मामला मेरे संज्ञान में है और एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जो लोग भी इस अमानवीय कृत्य में शामिल हैं, उनकी पहचानकर गिरफ्तार किया जाएगा।’

पशु बलि के पीछे यह है मान्यता
यह घटना सोमवार दोपहर को चित्तौड़गढ़ जिले के अकोला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ताना गांव में स्थित चामुंडा मंदिर में घटित हुई। एक भैंसे की मंदिर परिसर में बलि दी गई। इस दौरान सैकड़ों लोग वहां मौजूद थे। ग्रामीण मवेशी का सिर कलम होने का इतंजार करते रहे। माना जाता है कि यदि पशु बलि के बाद मवेशी का कटा हुआ सिर पहाड़ी से 400 फीट नीचे जाता है तो अगले वर्ष अच्छी बारिश होगी जबकि यदि बीच में ही कहीं सिर फंस जाता है तो इसका मतलब है कि मौसम खराब रहेगा।

बलि के वक्त मौजूद थे ये लोग
हैरानी वाली बात तो यह है कि पशु बलि के वक्त गांव के सरपंच समेत पूर्व प्रधान और अकोला पुलिस के अधिकारी भी मौजूद थे। पुलिस अधिकारी वहां ड्यूटी पर तैनात थे लेकिन किसी ने इस नृशंसता को रोकने की कोशिश नहीं की। अकोला एसएचओ रमेश चंद मीणा ने मीडिया को बताया कि चामुंडा देवी मंदिर में धार्मिक आयोजनों के मद्देनजर कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कपासन पुलिस स्टेशन और अकोला पुलिस स्टेशन से पांच पुलिसकर्मी भेजे गए थे।

एसएचओ बोले- मैं तो कपासन में था
एसएचओ ने कहा, ‘मैंने वहां पशुबलि के इस रिवाज के बारे में सुना था लेकिन जब यह घटना घटित हुई उस वक्त मैं दूर कपासन में ड्यूटी कर रहा था। जो पुलिसकर्मी मौके पर थे मैं उनसे मामले की जानकारी लूंगा और जरूरी कार्रवाई की जाएगी।’ ऐनिमल ऐक्टिविस्ट के मुताबिक, भारत में पशुबलि पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, पशुओं के प्रति क्रूरता, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत दंडनीय अपराध है।

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