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रैबीज डे पर विशेष : मरीज बढ़े, अस्पताल से वैक्सीन का स्टॉक खत्म

एनबीटी न्यूज, गुड़गांव

जिले में कुत्ते के काटने के मरीज जहां बढ़े हैं, वहीं इसकी वैक्सीन सिविल हॉस्पिटल में न के बराबर मिल रही हैं। पिछले कई महीनों से यहां स्टॉक खत्म है। सिर्फ इमरजेंसी में ही इंजेक्शन लगाया जा रहा है, उसके बाद की खुराक प्राइवेट अस्पतालों या क्लिनिकों पर निर्भर हैं। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के काटने के कम से कम 24 घंटे और अधिकतम 72 घंटे में एंटी रैबीज की पहली डोज जरूर लगवा लेनी चाहिए। घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल न करें। 24 घंटे के भीतर इंजेक्शन लगवाना संभव न हो तो घाव वाले हिस्से को पानी और साबुन के घोल से धोकर प्रभावित हिस्से में कोई भी एंटीसेप्टिक क्रीम, डेटॉल, स्प्रिट, बीटाडीन जरूर लगाएं।

सिविल हॉस्पिटल के फिजिशियन डॉ. वी के थापर ने बातया कि आजकल शहर में जानवरों के काटने के मामले बढ़े हैं। सुअर, चमगादड़ और बिल्ली के काटने के मरीज यहां बहुत कम आते हैं, जबकि कुत्ते और बंदर के काटने वाले मरीजों की संख्या बहुत अधिक है। ऐसे में पीड़ित को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। घाव को सबसे पहले डिटर्जेंट साबुन (कपड़े धोने वाले साबुन) से लगातार 15 मिनट तक धोना चाहिए। इस प्रक्रिया को इरीगेशन कहते हैं। घाव को धोने के बाद एंटीसेप्टिक क्रीम आदि का इस्तेमाल करना चाहिए। क्रीम लगाने के बाद खुला रखना चाहिए। ज्यादा खून बहने की सूरत में ही साफ पट्टी बांध सकते हैं। घाव पर टांके नहीं लगवाने चाहिए। पीसी हुई मिर्च, मिट्टी का तेल, नीम की पत्ती का घोल आदि लगाने की गलती न करें। घरेलु उपचार से ठीक होने का खतरा कम व घाव में इंफेक्शन होना खतरा अधिक होता है।

Bबस पहली डोज मिलती है, उसके बाद नहींB

कुत्ते के काटने के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल में रोजाना करीब 80-100 मरीज कुत्ते के काटने के पहुंच रहे हैं। इन हालातों में पीड़ितों को यहां एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं मिलते। पिछले करीब 9 महीने से सीमित स्टॉक ही आ रहा है। सिविल हॉस्पिटल सेक्टर-10 की प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर दीपा सिंधू ने बताया कि एंटी रैबीज इंजेक्शनों की पूर्ति पिछले काफी समय से नहीं हो रही है। कई बार इसके लिए स्वास्थ्य मुख्यालय को डिमांड भेजी गई है। जितना स्टॉक मिल पाता है। उसे केवल पहली डोज वाले मरीजों को दिया जाता है, जिससे हालात को काबू में किया जा सके। इस बारे में डीजी हेल्थ से संपर्क नहीं हो सका। सिविल हॉस्पिटल में एक इंजेक्शन के लिए केवल 100 रुपये लिए जाते है। वहीं, निजी स्टोर पर करीब 350 रुपये का एक इंजेक्शन बिक रहा है।

Bलक्षण : Bरैबीज रोगी को सबसे अधिक पानी से डर लगता है। किसी को रैबीज हो जाता है, तो वह यह रोग दिमाग के साथ-साथ गले को भी अपनी चपेट में ले लेता है। अगर रोगी पानी पीने की भी सोचता है तो उसके कंठ में जकड़न महसूस होती है, जिससे उसे सबसे अधिक पानी से ही खतरा होता है। रोगी के नाक, मुंह से लार निकलती है। यहां तक की वह भौंकना भी शुरू कर देता है। उसे रोशनी से डर लगता है। रोगी हमेशा शांत व अंधेरे वातावरण में रहना पसंद करता है।

Bउपचार : Bजानवरों के काटे जाने के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा 3 दिन बाद, तीसरा 7 दिन बाद, चौथा 14 दिन व 5वां 28वें दिन लगाया जाता है, 5वां इंजेक्शन चिकित्सक की सलाह से ही लगाया जाता है। डॉ. थापर बताते हैं कि 5 इंजेक्शन का कोर्स बीच में छोड़ना भी खतरनाक साबित हो सकता है।

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