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वडोदरा: मुस्लिम ऑटोवाला बना 'मंदिर का गाइड', अरब से आए थे पूर्वज

तुषार तेरे, वडोदरा
हमेशा की तरह इब्राहिम जमादार अपने दिन की शुरुआत सुबह नमाज पढ़ने के साथ करते हैं। इसके बाद ही वह रोजमर्रा के काम पर निकलते हैं। लेकिन पिछले दो दिन से उनका रूटीन बदल गया है। सुबह की नमाज के बाद इब्राहिम शहर में स्थित एक प्राचीन मंदिर के लिए निकल पड़ते हैं। वह वडोदरा के प्राचीन मंदिरों के साथ अपने रिश्ते को बयां करते हुए भावुक हो जाते हैं।

ऑटो ड्राइवर के साथ मंदिर के गाइड
रोज सुबह मंदिर पहुंचकर इब्राहिम कुछ उत्साही लोगों को अपने ऑटो में ऐतिहासिक मंदिरों के दर्शन कराने के लिए ले जाते हैं। इस दौरान वह ऑटो के ड्राइवर होने के साथ ही उनके गाइड की भूमिका में भी रहते हैं। मंगलवार को शुरू हुए पारंपरिक उत्सव के दौरान इब्राहिम सैकड़ों साल पुराने इन हिंदू मंदिरों के वास्तुशिल्प की लोगों को गहन जानकारी दे रहे हैं। वह अपने अनमोल ज्ञान को श्रद्धालुओं से शेयर कर रहे हैं। अपनी धार्मिक पहचान के उलट इब्राहिम इस काम के प्रति जुनून की हद तक समर्पित हैं।

पूर्वजों की जानकारी जुटाते मंदिरों का जाना इतिहास
हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को उन्होंने बताया, ‘इसकी शुरुआत उस वक्त हुई जब मैं अपने पूर्वजों बच्चा जमादार और हामिद जमादार के अतीत के बारे में जानने की कोशिश कर रहा था। कुछ सदी पहले ये दोनों भाई तत्कालीन में रहते थे। दोनों के सिपाही थे, जो सयाजीराव गायकवाड़ द्वितीय के कार्यकाल में आए थे। इसके बाद मुझे शहर के समृद्ध इतिहास के बारे में पता चला। इसके बाद मैंने प्राचीन धरोहरों के बारे में पढ़ना शुरू किया। इसके साथ ही मंदिरों के खूबसूरत वास्तुशिल्प के बारे में खास तौर पर अध्ययन किया।’

मंदिरों से मोहब्बत यूं होती गई मजबूत
इब्राहिम बताते हैं, ‘यह एक लव अफेयर था जो हर उस कहानी के साथ मजबूत होता चला गया जो मैंने इन मंदिरों के बारे में पढ़ीं। इसके बाद मैंने इन मंदिरों में रोज जाना शुरू कर दिया।’

वह कहते हैं, ‘इन मंदिरों में जाने पर मेरे समुदाय के किसी शख्स ने कोई आपत्ति नहीं जताई। दरअसल जल्द ही मैं सिख धर्म के बारे में भी अध्ययन करूंगा।’ दसवीं तक की पढ़ाई करने वाले इब्राहिम बताते हैं कि न तो धर्म और न ही परिवार मंदिरों के प्रति इस उनके इस शौक में कभी आड़े आया।

तीन भाषाओं के जानकार हैं इब्राहिम
इब्राहिम को कई भाषाओं का ज्ञान है। वह हिंदी, गुजराती और मराठी धाराप्रवाह बोलते हैं। वह अपने ज्ञान को पर्यटकों में बांटते हैं। इब्राहिम कहते हैं, ‘लोग इन मंदिरों की यात्रा करते हैं और खूबसूरत नक्काशी से हैरान रह जाते हैं। इसलिए मैं न केवल पर्यटकों को अपने ऑटो में घुमाता हूं, बल्कि इन स्मारकों की समृद्ध जानकारियों से उन्हें रूबरू कराता हूं।’

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