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वर्ष 1950 में संविधान के पन्नों पर हिंदू देवताओं की तस्वीर पर किसी को आपत्ति नहीं थी: प्रसाद

अहमदाबाद
केंद्रीय मंत्री ने बुधवार को कहा कि अगर बीजेपी ने देवी-देवताओं की तस्वीरों के साथ का प्रकाशन किया होता, तो चीख-पुकार मच जाती लेकिन 1950 में इसे अनुचित नहीं माना गया।

प्रसाद ने वर्ष 2000 में तत्कालीन संसदीय कार्यमंत्री प्रमोद महाजन की ओर से उपहार में दी गई संविधान की मूल प्रति को दिखाते हुए कहा कि संविधान के निर्माताओं ने देश को धर्मनिरपेक्ष नहीं घोषित किया क्योंकि वे जानते थे कि भारत की आत्मा धर्मनिरपेक्ष है। केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि मशहूर चित्रकार नंद लाल बोस ने संविधान के पन्नों पर भगवान बुद्ध , महावीर और ऐतिहासिक महापुरुषों के अलावा हिंदू देवी-देवताओं की भी तस्वीर बनाई क्योंकि यह फैसला किया गया था इस पर हमारी सांस्कृतिक विरासत प्रतिबिंबित होनी चाहिए। प्रसाद यहां बीजेपी की नगर इकाई की ओर से आयोजित कार्यक्रम ‘ राष्ट्रीय एकता मिशन’ को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘मान लीजिए अगर आज हम संविधान का प्रारूप तैयार करते और इन तस्वीरों को उसपर चित्रित करते तो चीख-पुकार मच जाती और यह कहा जाता कि भारत हिंदू राष्ट्र बन रहा है और धर्मनिरपेक्षता को खत्म किया जा रहा है।’ प्रसाद ने कहा, ‘हमारे संविधान निर्माताओं ने देश को धर्मनिरपेक्ष नहीं कहा क्योंकि वे जानते थे कि देश की आत्मा धर्मनिरपेक्ष है। जैसे ऋग्वेद कहता है कि सत्य एक है लेकिन विद्वान उसे अलग-अलग तरीके से परिभाषित करते हैं।’

बीजेपी नेता ने कहा, ‘आप मेरे सत्य के मार्ग का सम्मान करिए, मैं आपके मार्ग का करुंगा क्योंकि सभी मार्ग एक ही सच्चिदानंद को जाता है। यह भारत की सोच है।’ जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने का जिक्र करते हुए प्रसाद ने रियासतों का विलय सुनिश्चित करने में देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभाई पटेल की भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा कि अगर सरदार पटेल ने भारत का एकीकरण नहीं किया होता तो हैदराबाद रियासत ‘फिलस्तीन’ बन जाता। प्रसाद ने कहा, ‘अगर पटेल नहीं होते तो सोमनाथ मंदिर निर्माण के समय भी अयोध्या की तरह ही परेशानियां आतीं और अगर वह और जिंदा रहते तो इस मुद्दे का भी समाधान हो जाता।’

उन्होंने कहा कि सरदार पटेल के साथ अन्याय हुआ। उन्हें मृत्यु के 41 साल बाद भारत रत्न से सम्मानित किया गया। कानून मंत्री ने कहा, ‘वे कहते हैं कि अनुच्छेद-370 जम्मू-कश्मीर को शेष भारत से एक करने वाला सेतु था, लेकिन यह पुल नहीं अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने का मंच था। जब अनुच्छेद-370 लागू था तब 42,000 लोगों ने अपनी जान गंवाई।’ उन्होंने कहा, ‘वर्ष 2009 से 2019 के बीच कश्मीर को 2.70 लाख करोड़ रुपये दिए गए। इसका नतीजा था अलगाववाद और पथरबाजी हुई। अगर इतने लोग मारे गए, पैसे का दुरुपयोग हुआ तो क्या इसे रोका नहीं जाना चाहिए? अनुच्छेद-370 अस्थायी था और इसलिए उसे हटा दिया गया।’

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