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सदन में मेयर का व्यवहार सवालों के घेरे में

विशेष संवाददाता

की पिछली 3 बैठकों से कोई कार्यवाही नहीं हो पा रही। सवाल उठने लगे हैं कि इसका जिम्मेदार कौन है। विपक्ष के अलावा सत्ता पक्ष के पार्षद भी सवाल उठाने लगे हैं। उनको लगता है कि थोड़ा ‘अपनापन’ दिखाएं, तो सदन आराम से चल सकता है। लेकिन मेयर का सीधे तौर पर कहना है कि सदन में विपक्षी सदस्य ‘बदमाशी’ कर रहे हैं। अगली बार ऐसा किया, तो उनके खिलाफ बल प्रयोग किया जाएगा। हैरानी इस पर भी है कि मेयर सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित करते हैं, लेकिन आधे घंटे तक सदन शुरू नहीं होता। ऐसा पहली बार है जब विभाजित निगम में पूरे विपक्ष को मार्शलों से धक्के देकर निकलवाया गया।

विपक्ष को नहीं दी तरजीह

नॉर्थ एमसीडी की कल की बैठक में विपक्ष ने पार्किंग में भ्रष्टाचार और रेहड़ी पटरी वालों की समस्याओं को लेकर चर्चा का प्रस्ताव लगाया था। आरोप लग रहे हैं कि मेयर ने उनकी बात को तरजीह नहीं दी। वह कांग्रेस सदस्य मुकेश गोयल और आले मोहम्मद की ओर से लाए गए डेंगू मसले पर चर्चा कराना चाहते थे। इसके पीछे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अभियान को वजह बताया जा रहा था। इसी पर विवाद हो गया। सदन में हंगामा हुआ। विपक्ष के नेता सुरजीत सिंह पवार का मानना था कि डेंगू तो कंट्रोल में चल रहा है, इसलिए अन्य मसलों पर चर्चा कराई जाए, लेकिन मेयर ने ऐसा नहीं किया। डेंगू को लेकर सत्ता पक्ष भी कांग्रेसी सदस्यों के साथ उतर आया, जिसके बाद सदन में एक तरफ नारेबाजी हो गई। सत्ता व विपक्ष के कुछ सदस्य चाहते थे कि कैसे न कैसे सदन चले, क्योंकि वे लगातार 3 बार से अपनी समस्याओं को लेकर आ रहे हैं, पर सदन स्थगित होता जा रहा है।

बार-बार स्थगन और मार्शलों का एक्शन

नॉर्थ एमसीडी का सदन कल 3 बार स्थगित हुआ। मेयर का कहना था कि विपक्ष सदन नहीं चलाना चाहता, तो पवार आरोप लगा रहे थे कि संख्या बल पर उनकी आवाज को दबाया जा रहा है। पहली बार मेयर ने सदन 10 मिनट के लिए स्थगित किया। लेकिन सदन आधे घंटा स्थगित रहा। दूसरी बार भी उन्होंने 10 मिनट के लिए स्थगन किया, लेकिन फिर आधे घंटे से ज्यादा रुका रहा। हंगामा करने पर मेयर ने विपक्ष (आप पार्षदों) को सदन से 15 दिन के लिए सस्पेंड कर दिया। मार्शलों को आदेश दिया कि उन्हें सदन से निकाला जाए। जबर्दस्त हंगामा हुआ। मार्शलों ने विपक्ष को बाहर खदेड़ दिया। आप की महिला पार्षद डर के मारे खुद सदन से निकल गईं। निगम कार्यालय ने भी माना कि विभाजित निगम के इतिहास में ऐसा पहली बार है, जब समूचे विपक्ष को मार्शलों के जरिए बाहर निकलवाया गया।

मेयर का रुख

पत्रकारों से बातचीत में मेयर ने कहा कि सदन में विपक्षी सदस्य बदमाशी कर रहे थे। अगली बार ऐसा करेंगे, तो बल प्रयोग करने से भी नहीं हिचकेंगे। मेयर से पूछा गया कि बल का क्या अर्थ है, तो उनका कहना था कि अगली बैठक में पता चल जाएगा। उन्होंने बताया कि डेंगू मसले पर सीएम के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पास किया गया है। मेयर का कहना था कि विपक्षी सदस्य सदन में अराजकता फैला रहे थे। उनका व्यवहार अशोभनीय था। निगम की कार्यवाही को लेकर सत्ता पक्ष के कुछ पार्षदों से बात की गई, तो उनका कहना था कि सदन चलाने के लिए मेयर को गंभीरता दिखानी चाहिए। हम पूरी तैयारी कर सदन में आते हैं, लेकिन हर बार निराश होकर चले जाते हैं। अगर यही हाल रहा तो अगली बार वरिष्ठ नेताओं से मेयर की शिकायत की जाएगी। विपक्षी नेता पवार का कहना था कि हम किसी भी मुद्दे पर चर्चा के खिलाफ नहीं हैं, परन्तु बीजेपी के मेयर ने सदन में तानाशाह रवैया अख्तियार करते हुए अपने ही द्वारा स्वीकृत अल्पकालिक प्रश्न पर चर्चा न कराकर बीजेपी और कांग्रेस को राजनीतिक रोटियां सेंकने का अवसर दिया।

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