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सिंचाई भ्रष्टाचार: उच्च न्यायालय 13 फरवरी को न्यायिक याचिका पर करेगी सुनवाई

नागपुर, 15 जनवरी (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने बुधवार को कहा कि वह 13 फरवरी को विदर्भ सिंचाई परियोजना घोटाला और महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार के खिलाफ न्यायिक जांच की याचिका पर सुनवाई करेगी] हालांकि राकांपा ने इस याचिका का विरोध किया है। न्यायमूर्ति एस बी शुक्रे और न्यायमूर्ति माधव जामदार की पीठ करोड़ों रुपये के इस घोटाले की जांच राज्य की भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) से लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो या प्रवर्तन निदेशालय को हस्तांतरित करने की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थी। पुणे के बारामती से राकांपा के विधायक पवार 1999-2009 के बीच कांग्रेस-राकांपा सरकार में जल संसाधन मंत्री थे। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विदर्भ सिंचाई विकास निगम के अध्यक्ष रह चुके पवार और निगम के अधिकारियों ने परियोजना की निविदाएं जारी करते समय ठेकेदारों के साथ सांठ-गांठ किया था और राजकोष को नुकसान पहुंचाया। याचिकाकर्ताओं में से एक गैर सरकारी संगठन जनमंच के वकील फिरदौस मिर्जा ने बुधवार को एक आवेदन दायर किया है जिसमे अदालत से न्यायिक जांच गठित करने का अनुरोध किया गया है। इस आवेदन में कहा गया है कि याचिकाकर्ता को राज्य और केन्द्र की जांच एजेन्सियों में भरोसा नहीं है और उसे लगता है कि जांच एजेन्सियां पवार का पक्ष ले रही हैं। पवार के वकील प्रसाद धाकेपालकर ने इस आग्रह का विरोध किया और कहा कि विशेष जांच दल पहले ही गठित किया जा चुका है और कथित भ्रष्टाचार की जांच जारी है। पीठ ने कहा कि वह इस मामले में 13 फरवरी को अंतिम दलीलें सुनेगी। महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक ने पिछले साल दिसम्बर में उच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में कहा था कि एसीबी जांच में पवार की कोई भूमिका नहीं पाई गई है।

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