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सेंसेक्स की 20% कंपनियों पर रिटर्न माइनस में

आशुतोष आर श्याम, ईटीआईजी
केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट टैक्स में भारी कटौती करने के बाद भी कम प्राइस टु बुक वैल्यू वाले शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी नहीं बढ़ी है। इंडेक्स में शामिल हर पांच में से एक कंपनी में बुक वैल्यू से नीचे ट्रेडिंग हो रही है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, ब्लूचिप कंपनियों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ONGC, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, DLF और ऑयल इंडिया के शेयर बुक वैल्यू से कम पर ट्रेड कर रहे हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती से , ONGC और ऑयल इंडिया के मुनाफे में 4.4-9.94 फीसदी की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी।

109 शेयरों में बुक वैल्यू पर ट्रेडिंग
बीएसई 500 इंडेक्स में 109 शेयरों में बुक वैल्यू पर ट्रेडिंग हो रही है और इनका भारतीय शेयर बाजार के कुल मार्केट कैप में 10 प्रतिशत का योगदान है। बीएसई 500 इंडेक्स में बुक वैल्यू से नीचे ट्रेड करने वाली कंपनियों में से एक तिहाई वित्तीय सेवा क्षेत्र की हैं। पिछले तीन महीनों में बुक वैल्यू से नीचे ट्रेड करने वाली कंपनियों का औसत रिटर्न माइनस 24.4 फीसदी रहा है। वहीं, बीएसई 500 इंडेक्स में बुक वैल्यू से नीचे ट्रेड करने वाले शेयरों की बुक वैल्यू के मुकाबले कीमत 0.57 रही है, जबकि निफ्टी के लिए प्राइस टु बुक रेशियो 2.78 है।

बैंकिंग सेक्टर में प्राइस टु बुक वैल्यू में और गिरावट की आशंका
दुनिया के जाने-माने निवेशक और सर्वाधिक अमीर लोगों में शामिल वॉरेन बफेट ने कहा था कि वह इंट्रिंसिक वैल्यू या फंडामेंटल वैल्यू से 25 प्रतिशत नीचे ट्रेड करने वाले स्टॉक्स में से पोर्टफोलियो में शामिल करने वाले शेयरों की तलाश करते हैं। इस तरीके में दिक्कत यह है कि आम निवेशक बफेट की तरह किसी कंपनी की सही इंट्रिंसिक वैल्यू का पता नहीं लगा पाते। बैंकिंग सेक्टर में अभी प्राइस टु बुक वैल्यू इसलिए कम है, क्योंकि आगे चलकर उनके बैड लोन में बढ़ोतरी की आशंका है। बैड लोन बढ़ने से भविष्य में इन कंपनियों की बुक वैल्यू में गिरावट आएगी। इसका मतलब यह है कि भले ही आज इन कंपनियों की प्राइस टु बुक वैल्यू कम दिख रही है, लेकिन भविष्य में बैड लोन बढ़ने पर इसमें बढ़ोतरी हो सकती है।

विनिवेश योजना में होगी दिक्कतें
वैल्यू स्टॉक्स में लगातार डी-रेटिंग के कारण भविष्य में बिजनेस बढ़ाने या बैलेंस शीट पर कर्ज घटाने के लिए कंपनियों को फंड जुटाने में दिक्कत होगी। इससे सरकार के लिए विनिवेश योजना को सफलतापूर्वक पूरा करना भी आसान नहीं होगा।

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