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90 फर्जी लाइसेंस में असलहा बाबू के खिलाफ एफआईआर

– बड़ों को बचाने के लिए छोटों पर की जा रही फौरी कार्रवाई

– हर टेबल पर फाइल जाती, लेकिन सिर्फ सिटी मैजिस्ट्रेट से चार्ज वापस लिया

Bएनबीटी ब्यूरो, कानपुर : Bकलेक्ट्रेट के असलहा विभाग से 90 फर्जी लाइसेंस जारी होने के मामले में भले ही कार्रवाई का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर 20 दिन तक ढीलेढाले रवैये के बाद प्रशासन ने सोमवार को एफआईआर लिखवाई। असलहा विभाग में काम करने वाला बाहरी शख्स पुलिस से दूर है। वहीं दूसरी तरफ अपनी गर्दन बचाने के लिए सिर्फ सिटी मैजिस्ट्रेट से प्रभारी अधिकारी शस्त्र का चार्ज वापस ले लिया गया।

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तगादे पर खाया जहर

Bसूत्रों के अनुसार, असलहा विभाग में बड़ी गड़बड़ की सूचना मिलने के बाद भी केस दबाने की भरपूर कोशिश की गई। इस दौरान ‘कारीगर’ जितेंद्र भाग निकला, जबकि क्लर्क विनीत तिवारी भी अंडरग्राउंड रहा। वह लौटा और अधिकारियों से मिला। इसके 2-3 दिन बाद उसने जहर खा लिया। चर्चा यह भी है कि जब विनीत से लोगों ने रुपयों का तगादा किया तो वह अवसाद में आ गया और खुदकुशी की कोशिश की। कर्मचारियों के दबाव के चलते इतने संगीन मामले में प्रशासन कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा सका। इस बीच सीडीओ और एडीएम (सप्लाई) की जांच में 90 फर्जी लाइसेंस की बात सामने आई तो हर कोई हैरान रह गया। हालात संभालने के लिए फटाफट जांच पूरी कर रिपोर्ट लिखवाने के आदेश दिए गए। सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले एक मैजिस्ट्रेट ने क्लर्क विनीत के बयान लिए, लेकिन उसे छिपाया गया। जबकि ऐसा माना जा रहा है कि 50 फाइलें विनीत के पास ही हैं। बीते दिनों साथी कर्मचारियों ने उससे बातचीत शुरू की तो वह उसका ब्लड प्रेशर कम हो गया। इसके बाद फर्जी तरीके से लाइसेंस बनने की बात पुख्ता होते ही कर्मचारी संघ ने भी उससे किनारा कर लिया।

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इन सवालों के जवाब नहीं

Bमामला उछलने के बाद अधिकारी असहज हुए और सोमवार दोपहर कोतवाली में एफआईआर लिख ली गई। एसीएम-6 हरिशचंद्र सिंह ने असलहा बाबू विनीत तिवारी, जितेंद्र और अन्य के खिलाफ धारा-409 (लोकसेवक का विश्वास का आपराधिक हनन), 420 (धोखाधड़ी) और 120 बी (साजिश करने) आदि धाराओं में रिपोर्ट लिखवाई गई है। धारा-409 गैर जमानती है। दूसरी तरफ पूरी कवायद में सिर्फ सिटी मैजिस्ट्रेट और कुछ बाबुओं पर ही कार्रवाई से जानकर हैरान हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़े सिस्टम में सिर्फ सिटी मैजिस्ट्रेट अकेले कैसे दोषी हो सकते हैं, जबकि फाइल हर अधिकारी की टेबल पर जाती है। महीनों से जिलाधिकारी के स्कैन किए हुए हस्ताक्षर का दुरुपयोग हो रहा था और किसी को भनक तक नहीं लगी।

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पुलिस सक्रिय

Bसूत्रों के अनुसार, अगले एक-दो दिन दिन में विनीत अस्पताल से डिस्चार्ज हो सकता है। अस्पताल के बाहर सादे कपड़ों में पुलिस जवान कड़ी नजर रख रहे हैं। वहीं कारीगर जितेंद्र को पकड़ने के लिए भी पुलिस छापेमारी कर रही है।

पुलिस आरोपितों से पूछताछ करेगी। पुराने मामले में एटीएस के किसी नोटिस की जानकारी नहीं है। मेरे हस्ताक्षर को कंप्यूटर में स्कैन किया गया था। – विजय विश्वास पंत, डीएम

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