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BHU: छेड़खानी के आरोपी प्रफेसर को छुट्टी पर भेजा गया

वाराणसी
में दो दिनों से जारी धरने के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने रविवार को एक बड़ा फैसला लिया। प्रशासन ने रविवार को अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक के बाद छेड़खानी के आरोपों का सामना कर रहे जंतु विज्ञान विभाग के प्रफेसर एस.के.चौबे लंबी छुट्टी पर भेज दिया है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह भी फैसला किया है कि इस मामले को पुन: विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के समक्ष विचार के लिए रखा जाएगा।

दरअसल, बीएचयू के जंतु विज्ञान विभाग की ओर से वर्ष 2018 में पुणे गए शै‍क्षणिक टूर के दौरान प्रफेसर एस.के.चौबे पर छात्राओं के साथ अश्‍लील हरकत करने का आरोप लगा था। इस मामले की जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी विश्‍वविद्यालय ने उन्‍हें कुछ दिनों पहले ही बहाल कर दिया। इसकी जानकारी मिलने पर आक्रोशित छात्राओं ने शनिवार की देर शाम मुख्‍य द्वार पर पहुंच प्रफेसर को बर्खास्‍त करने की मांग करते हुए धरना-प्रदर्शन शुरू किया जो पूरी रात चलता रहा। रातभर दर्जनों छात्र-छात्राएं मुख्‍य द्वार के नीचे ही बैठे रहीं। रविवार को भी बीएचयू प्रशासन के अफसरों ने छात्राओं से बातचीत करने का प्रयास किया, हालांकि बीएचयू प्रशासन की ओर से मामले पर पुनर्विचार का आश्‍वासन बेअसर रहा।

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कार्यपरिषद के सामने दोबारा रखा जाएगा केस
इस मामले को लेकर दिन भर विश्वविद्यालय में बैठकों का दौर जारी रहा। इसके बाद शाम को यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा कि विवि प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि इस मामले को एक बार फिर कार्यकारिणी परिषद के समक्ष रखा जाएगा और जब तक परिषद इस पर विचार करे तब तक के लिए प्रफेसर एसके चौबे को लंबी छुट्टी पर जाने के लिए आदेश दिया गया है। इसके अलावा विश्वविद्यालय के बयान में यह भी कहा गया कि बीएचयू का प्रशासन विश्‍वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार के लैंगिक भेदभाव अथवा उत्पीड़न की घटनाओं के प्रति संवेदनशील है और प्रकार की घटनाओं को बर्दाश्‍त नही किया जाएगा।

प्रियंका गांधी ने किया था आंदोलन का समर्थन
बता दें कि बीएचयू में जारी धरने के बीच रविवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी अपनी एक फेसबुक पोस्ट में छात्राओं को अपना समर्थन दिया था। प्रियंका ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि ‘बीएचयू में छात्राओं को बार-बार विरोध करने के लिए बाहर निकलना पड़ता है, क्‍योंकि उनको सुरक्षा की गारंटी मिलती नहीं है। एक प्रफेसर पर कई सारी लड़कियों द्वारा की गई शिकायत सही पाई गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर निल बटे सन्‍नाटा। आगे लिखा कि बेटी बचाओ अभियान अब बेटियां खुद चलाएंगी।’

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